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इंसाफ की गुहार

इंसाफ की उम्मीद में जंतर-मंतर पर पूरे साल व्यक्तिगत या सामूहिक धरना-प्रदर्शन होते रहते हैं। नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित ऐतिहासिक जंतर-मंतर मौजूदा समय में धरना-प्रदर्शनों का पर्याय बन चुका है। इस इमारत के पास हर दिन, हर समय लोग   धरने पर बैठे रहते हैं। उनका मानना होता है कि यहां बोलने से सरकार उनकी बात सुन लेगी। वैसे जंतर-मंतर पर धरना का मतलब संसद पर धरना देना ही है। संसद की सुरक्षा में कोई व्यवधान न आए इसलिए सरकार ने आंदोलनकारियों और संगठनों को जंतर-मंतर पर बैठने की अनुमति दे रखी है। यूं तो जंतर पर सालों भर प्रदर्शन होते रहते हैं। परंतु संसद सत्र के दौरान इनकी संख्या अपेक्षाकृत अधिक होती है। चुनावी मौसम ना हो तो सरकार की नजर में इन धरनों की कुछ हैसियत नहीं होती है। थोड़ी-बहुत खोज-खबर ले तो पता चलता है कि उन्हें खानापूर्ति वाला आश्वासन दे दिया जाता है। यहां बैठे लोगों का बड़ा सहारा मीडिया होता होता है। पर बड़े व्यवसायिक घराने और सरकारी दखल के कारण मीडिया की स्थिति भी अच्छी नहीं है। पीटीआई के एकाधिकार को तोड़ने के लिए कुछ बड़े अखबारी घराने ने समाचार एजेंसी यूनीवार्ता की स्थ...
हिंदू विश्वकोष पश्चिम के दृष्टिकोण से हिंदू धर्म का विश्वकोष आ गया है। यह खबर वाशिंगटन से आई है। इसके लोकार्पण की तस्वीर भी कुछ अखबारों में छपी हैं। इस विश्वकोष की प्रेरणा स्वामी चिदानंद सरस्वती को किससे मिली, यह विवाद का विषय है। क्योंकि प्रेरक होने के अनेक दावेदार हैं। विश्वकोष का विवरण भी छपा है। जिसके अनुसार इसमें इतिहास, भाषा, कला, संस्कृति, वास्तुकला आदि के अलावा धार्मिक तथ्य भी दिए गए हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना के प्रोफेसर हाल फ्रेंच ने इसे ग्यारह अध्यायों में तैयार किया है। प्रत्येक अध्याय में 600 से 700 पृष्ठ हैं। इस विश्वकोष में 7000 से ज्यादा लेखों का संकलन किया गया है। हिंदू विश्वकोष की प्रबंधक संपादिका और इंडिया हेरिटेज रिसर्च फाउंडेशन की सचिव साध्वी भगवती सरस्वती का कहना है कि हिंदू दुनिया के कई देशों में बसे हैं। उनके पास बच्चों को धर्म की जानकारी देने के लिए कोई आधारभूत स्त्रोत नहीं था। उनका दावा है कि इस कमी को हिंदू विश्वकोष दूर करेगा। अब विश्वकोष को पढ़कर ही विशेषज्ञ बताएंगे कि साध्वी भगवती का दावा वास्तव में कितना सही है। यह विश्वकोष क्या हिंदू धर्म को सह...