अब स्काइप से भी हो रहे हैं तलाक

इन दिनों तलाक से जुड़े मुद्दे और उनके कानूनी मसाले सुर्ख़ियों में है. एक तरफ जहां मुस्लिमों के तीन तलाक के मुद्दे पर देश भर में बहस छिड़ी हुई है वहीं  पुणे के फैमिली कोर्ट में पहली बार स्काइप पर तलाक का फैसला हुआ. यह पुणे के फैमिली कोर्ट में पहला ऐतिहासिक फैसला है जिसमे आपसी सहमति से तलाक पर कोर्ट की मोहर डिजिटल तरीके से लगी है. यह बात और है की सुप्रीम कोर्ट भी आने वाले दिनों में पेपर रहित हो डिजिटल स्वरुप धारण कर लेगा. लेकिन इससे पहले पुणे की कोर्ट ने ऑनलाइन सुनवाई कर अपना फैसला सुनाया है. एक दूसरे के सहमति से तलाक के लिए एक दम्पति ने कोर्ट में आवेदन दिया था. पति सुनवाई के लिए सिंगापुर से भारत तो आ गया लेकिन व्यक्तिगत कारणों  से पत्नी लंदन से नहीं आ सकी. ऐसी स्थिति में कोर्ट ने केस को आगे की तारीख न देते हुए स्काइप पर पत्नी को अपनी राय व्यक्त करने की अनुमति दी. वकील ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के लिए अपील की थी.  जिसे कोर्ट ने मंजूरी दे दी थी. पति के कोर्ट में उपस्थित था और पत्नी स्काइप के जरिए अपनी राय कोर्ट के समक्ष रख रही थी. सीनियर डिविजन जज वी.एस. मलकानपट्टे रेड्डी स्काइप पर यह सुनवाई कर रहे थे. दोनों पक्षों की बात सुनकर उन्होंने स्काइफ पर ही तलाक के लिए मंजूरी दे दी.

इस दंपति ने 2015  में अमरावती में प्रेमविवाह किया था. ये एक ही कॉलेज में  पढ़ते थे. शादी करने के बाद, दोनों नौकरी के सिलसिले में पुणे आ गए.पुणे में नौकरी करने के कुछ समय बाद ही पति को सिंगापुर और पत्नी को लंदन जाने का अवसर मिला. पति तो सिंगापुर चला गया लेकिन पत्नी पुणे में ही रह गयी. महीने भर के अंदर दोनों में अपने-अपने करियर को लेकर वाद-विवाद होने लगे. जिसके कारन दोनों ने आपसी सहमति से तलाक लेने का फैसला किया. फिर  2016 में तलाक के लिए आवेदन दिया था. आवेदन देने के बाद पत्नी लंदन चली गई. शादी उनके करियर में आड़े न आए इसलिए पत्नी ने तलाक की मांग की थी और आवेदन में भी यही लिखा था कि शादी करियर में बाधा बन रही है.
आपसी सहमति से तलाक का मतलब है कि पति और पत्नी दोनों सौहार्दपूर्ण ढंग से अलग होना चाहते हैं. जब दम्पति को लगता है कि वे एक साथ नहीं रह सकते और सबसे अच्छा समाधान तलाक ही है तो एक दूसरे के खिलाफ कोई आरोप लगाए बिना, सम्मानजनक ढंग से अदालत के समक्ष संयुक्त रूप से याचिका देते हैं है कि वे आपसी सहमति के तलाक लेना चाहते हैं. आपसी सहमति से होने वाला तलाक भारत में बड़ी तेजी से बढ़ रहा है. कुछ संस्थाओं का मानना है कि यह भारत में होने वाला तलाक का सबसे तेज रूप है।
पुणे के कुछ कामकाजी पुरुष एवं महिलाएं तलाक के मामले में अपनी बेबाक राय रखते हैं. लोगों का मानना है कि यदि आप अपने करियर में आगे बढ़ रहे हैं तभी आप एक सकूं भरी ज़िंदगी जी सकते हैं. नहीं तो रोजमर्रा कि खिचखिच लगी रहती है. जब लडके और लड़की दोनों सामान रूप से काबिल हो तो किसी एक को समझौता करना नागवार गुजरता है. ऐसे में उनके बिच झगड़े होते ही रहते है. इससे बेहतर है कि आपसी सहमति से अलग हो जाए. सिटी बैंक में काम करने वाले प्रकाश कहते हैं, 'मैंने कई लोगों को शादी को ढोते हुए देखा है. वे उसे न तो मन से निभा रहे होते है न उसे छोड़ रहे होते हैं. उनके मन में तलाक के बाद कि ज़िन्दगी को लेकर घबराहट होती है. ऐसी हलकट में मेरा मानना है कि हमें तलाक से डरना नहीं चाहिए. क्योंकि तलाक के बाद भी खुशनुमा जिंदगी बिताई जा सकती है. तब हम किसी रिश्ते या जिम्मेदारी का बोझ नहीं उठा रहे होते हैं. अलग-अलग होने के बाद भी अगर चाहें तो दोस्त बना जा सकता है.'  वहीं एक आईटी कंपनी में काम करने वाली पूजा कहती हैं, 'शादी से कहीं ज्यादा हौव्वा तलाक का होता है. मेरे हिसाब से मजबूरी में रिश्ते ढोने से अच्छा है कि नई शुरुआत की जाए. मगर हमारी संस्कृति में इतनी सुविधा नहीं है. लड़की के सामने कई सवाल होते हैं. अपने माता-पिता और बच्चों  दोनों की वजह से उसे मुसीबतों का सामना करना पड़ता है.अगर तलाक को व्यक्तिगत ही रहने दिया जाए तो बहुत से लोग नई शुरुआत कर सकेंगे. 
कई लोग कोर्ट द्वारा स्काइप पे सुनवाई करने कि प्रक्रिया से काफी खुश हैं. उनका कहना कि इससे तलाक लेने में कोर्ट के लम्बे चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. आज-कल पति-पत्नी को साथ बिताने के समय नहीं होता ऐसे में कोर्ट के लिए समय निकलना बहुत मुश्किल होता है. 

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