नई सरकार का इंतजार

चुनाव के दैरान इक्का-दुक्का धरना-प्रदर्शनों को छोड़ दें तो जंतर-मंतर पर इस पखवाड़े सन्नाटा ही पसरा हुआ था। ऐसा लग रहा था मानो जंतर-मंतर को भी नई सरकार का इंतजार हो।
इस पखवाड़े के शुरुआती दिनों में जंतर-मंतर पर घूमते हुए लगा कि यह वास्तविक जंतर-मंतर नहीं है। क्योंकि जंतर-मंतर ध्ारना-प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। और इन दिनों यहां कोई धरना-प्रदर्शन नहीं हो रहा है। कहीं कोई अपने हाथ में माइक ले कर अपने अधिकारों की बात नहीं कर रहा है। कई महीनों से यहां डेरा डाले इक्का-दुक्का लोगों को छोड़ दें तो जंतर-मंतर पर पूरी तरह सन्नाटा फैला हुआ था। जंतर-मंतर पुलिस चौकी में बैठे दिल्ली पुलिस के सिपाही भी सुस्ता रहे थे। पूछने पर एक सिपाही ने बताया कि आम चुनाव हो रहे हैं इसलिए यहां धरना-प्रदर्शन नहीं हो रहा है। लोगों का मानना है कि चुनाव की वजह से केंद्र सरकार हमारी बातें सुनने और निर्णय करने की स्थिति में नहीं है।
बहरहाल, इस बार जंतर-मंतर पर एक दिन एक अलग माहौल देखने को मिला। यह माहौल खुशी और जश्न का था। आम तौर पर यहां सताए हुए लोग अपनी फरियाद ले कर आते हैं। परंतु बीते 19 अप्रैल की शाम यहां किन्नरों ने जम कर जश्न मनाया। दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में किन्नरों को तीसरे लिंग का दर्जा दिए जाने का फैसला सुनाया है। किन्नरों का कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से उन्हें शिक्षा व रोजगार हासिल करने के भी मौके मिलेंगे। लंबे समय से किन्नरों की हक की लड़ाई लड़ रही लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि ‘‘आज हमने अपने अस्तित्व का अधिकार पाया है। लोग अब हमें मानवता की नजर से देखेंगे।’’ लक्ष्मी ने आगे कहा कि ‘यह उनकी पहली जीत है और आगे बहुत कुछ करना बाकी है।’
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने किन्नरों के पक्ष में अपना निर्णय सुनाते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि उनके लिए शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था की जाए। संभवतः कोर्ट के इस फैसले से समाज में एक बड़ा परिवर्तन आ सकता है। इससे पहले दोपहर में शिया घर्म गुरु कल्बे जब्बाद के विरोध में कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। इन लोगों ने कल्बे जब्बाद का पुतला दहन भी किया। बातचीत में पता चला कि लखनऊ में कांग्रेस विधायक हसन अहमद पर हमला करने के विरोध में वे लोग यहां एकत्रित हुए हैं। हसन अहमद मुस्तफाबाद सीट से कांग्रेस के विधायक हैं। पार्टी ने उन्हें लखनऊ क्षेत्र का पर्यवेक्षक बनाकर वहां भेजा है। वहां उन पर कुछ युवकों ने रेस्तरां में घुसकर हमला किया था। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उन पर कल्बे जब्बाद ने हमला करवाया है। वे लोग कल्बे जब्बाद के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे थे। कांग्रेस विधायक मतीन अहमद व पूर्वी दिल्ली नगर निगम की नेता प्रतिपक्ष वरयाम कौर ने आरोप लगाया कि कल्बे जब्बाद भारतीय जनता पार्टी से मिले हुए हैं।
एकाध प्रदर्शनों को छोड़ दे तो इस बार जंतर-मंतर पर कोई खास हलचल नहीं हुई। इस बाबत यहां चाय और खाने-पीने की वस्तुएं बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि नई सरकार का इंतजार सभी को है। शायद यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग यहां विरोध दर्ज कराने नहीं आ रहे हैं। एक बार नई सरकार बन जाए तो फिर यहां की चहलकदमी देखते ही बनेगी।

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