सिर्फ पैसा बनाने का धंधा
दिल्ली में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं का हॉस्टल (पीजी) आज एक व्यवसाय का रूप ले चुका है। लेकिन इन हॉस्टलों में ना तो पर्याप्त सुविधा है, ना कोई सुरक्षा का इंतजाम। विडंबना यह है कि इन हॉस्टलों को लेकर शासन-प्रशासन ने भी दिशा-निर्देश अब तक नहीं बनाए हैं। “पीजी में रहने में तो बहुत दिक्कतें आती हैं। एक कमरे में जब दो-तीन लड़कियां रहती हैं तो कई मामलों में समझौता करना ही पड़ता है। यहां हमारा अपना घर जो नहीं है।” सत्या यह कहते हुए एक फीकी-सी मुस्कान बिखेरती हैं। वो गोरखपुर की रहने वाली हैं और दिल्ली में एक निजी कंपनी में नौकरी करती हैं। वो बताती हैं कि दिल्ली में नौकरी मिलने से वो काफी उत्साहित थी। लेकिन साथ-साथ उन्हें अपने रहने के लिए ठिकाने की भी तलाश थी। किराए पर मकान लेना उनके बजट से बाहर था इसलिए कुछ पहचान वालों और मित्रों के कहने पर वो लक्ष्मी नगर में एक पीजी में रहने लगी। कुछ ऐसी ही कहानी बिहार के चंपारण जिले से यूपीएसी की तैयारी करने आई शिल्पा भी सुनाती हैं। वे साल 2013 में दिल्ली आईं थी। पहले तो उन्होंने मुखर्जी नगर में कई कमरे तलाशे पर बजट में कोई ढंग का कमरा नहीं ...