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गृहिणी: सबसे बड़ा सम्मान

" उड़ान तो वो है जो पंखों की मोहताज नहीं होती ,  मंच , श्रोता , शोहरत की तलबगार नहीं होती तैरना तक सिखा देती है लहरे ,  डूबतें सिर्फ वो हैं जिनमें जीने की चाह नहीं होती" हमने अपने आस-पास न जाने कितनी महिलाओं को संघर्ष करते देखा है। रोजमर्रा की जिंदगी में उलझी हुई महिलाओं को पता ही नहीं चलता कि कब उनकी सुबह शाम में ढ़ल गई और कब रात से सुबह हो गई। घड़ी की सुईयों की तरह हर पल वे अपने काम में निरत रहती हैं। उनका काम भी कितना अजीब है ना। खुद के लिए नहीं बल्कि अपने परिवार के लिए। परिवार ,  जिसे वे अपने आप से ज्यादा अहमियत देती हैं। सुबह उठो ,  बच्चों को उठाओं ,  तैयार करवाओ ,  स्कूल भेजो। फिर घर के अन्य सदस्यों के लिए नाश्ता चाय और लंच की तैयारी करों। सुबह से हो गई दोपहर। अभी थोड़ी देर बैठने का मन हुआ ही कि बच्चों के स्कूल से आने का टाइम हो गया। जल्दी-जल्दी उन्हें लेने के लिए बस स्टॉप जाओ।   घर आकर उन्हें खाना खिलाई। होमवर्क कराई , फिर ट्यूशन ले कर जाओं। ट्यूशन हो गया तो डांस क्लास या फिर अन्य किसी गतिविधि के क्लास में लेकर जाओ। पता ही नहीं च...