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शुद्ध आबो-हवा के लिए हरियाली जरूरी

हरियाली और पर्यावरण के बीच चोली-दामन का संबंध है। राष्ट्रीय राजधानी में घटती हरियाली जलवायु पर असर डालती है। मौसम विज्ञान विभाग की ओर से राज्यों की जलवायु परिवर्तन पर पिछले दिनों जारी की गई एक रिपोर्ट इसकी तस्दीक करती है। एक समय ऊंचाई से देखने पर दिल्ली का बड़ा इलाका बगीचे की तरह नजर आता था। हालांकि, सड़क किनारे करीने से लगे पेड़ और रिज क्षेत्र दिल्ली की खूबसूरती को अब भी बरकरार रखे हुए है। यहां की हरियाली ही थी, जिसने मुगलों को अपनी तरफ आकर्षित कर लिया था। अंग्रेजों ने भी यहां की आबो-हवा को अपने अनुकूल पाया और कोलकाता से दिल्ली राजधानी लेकर आ गए। अब स्थिति बदल गई है। आबादी के बोझ से दिल्ली महानगर बेदम है। हालत यह है कि प्रत्येक साल करीब पांच लाख लोग रोजगार की तलाश में यहां आते हैं। फिर यहीं के होकर रह जाते हैं। हालांकि, यह रिवाज पुराना है। पिछले कई दशकों से रोजगार और शिक्षा की तलाश में लोग यहां आ रहे हैं। इनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए दिल्ली महानगर के संसाधनों का अतिरिक्त दोहन किया जा रहा है। महानगर में जो बुनियादी ढांचे विकसित किए जा रहे हैं, उसमें दिल्ली के पेड़ों...